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Friday, 9 January 2015

वृद्ध ने कहा जिंदा हूं, मुझे पेंशन दे दो

वृद्ध को मृत मानकर ही उसकी पेंशन बंद कर दी गई। सात माह पहले बंद पेंशन के लिए वह खुद को जिंदा बताकर अधिकारियों से गुहार करता रहा, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हो रही।


जीलो गांव के हनुमान सैनी की सात माह पूर्व अचानक वृद्धावस्था पेंशन बंद कर दी गई। कारण बताया गया कि उसकी मृत्यु हो गई, जबकि हनुमान सैनी खुद रोज अधिकारियों के सामने उपस्थित होकर अपने जीवित होने का प्रमाण देता आ रहा है।

इधर, जानकारी पर सामने आया कि गांव के ही एक अन्य हनुमान सैनी नाम के व्यक्ति का सात माह पूर्व निधन हो गया। अधिकारियों ने बिना जांच पड़ताल किए जीवित हनुमान सैनी की पेंशन बंद कर दी, जबकि जिसका निधन हो गया उसके यहां पेंशन आ रही है।

डाकपाल कालूराम मीणा ने बताया की गांव के ही एक दूसरे हनुमान सैनी की 17 जून को मृत्यु होने के बाद भी उसकी पेंशन आ रही है, जिसको हम हर माह वापस कर रहे हैं जबकि जीवित हनुमान सैनी की जून से पेंशन बंद कर दी गई है।
वाकई में मामला बेहद गंभीर है। ऎसा नहीं होना चाहिए। मामला आते ही समाधान कर दिया जाएगा।


दयाचंद आर्य, बीडीओ, नीमकाथाना

Source: Udaipur News from Rajasthan News Paper

Thursday, 8 January 2015

विरोध पढ़े-लिखों का नहीं, सरकार की मंशा का : सचिन

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा कि पंचायत चुनाव में प्रत्याशियों की शैक्षणिक योग्यता को लेकर कांग्रेस का विरोध नहीं है, लेकिन ऎतराज इसके लिए लाए गए अध्यादेश के पीछे सरकार की मंशा का है। न सिर्फ कांग्रेस बल्कि एक दर्जन राजनीतिक दल एक मंच पर आकर इसी वजह से अध्यादेश का विरोध कर रहे हैं।


पायलट ने बुधवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पढ़े-लिखे लोग पंचायतों में जीत कर आएं, इसका कोई विरोध नहीं है। लेकिन चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से एक दिन पहले अध्यादेश लाने और 50 फीसदी से ज्यादा लोगों को चुनाव लड़ने से वंचित किए जाने का विरोध हो रहा है।



चुनाव के वक्त बागी नेताओं को पार्टी में शामिल किए जाने के उन्होंने कहा कि पार्टी ने सकारात्मक फैसला किया है। इसे जाति विशेष के नजरिए से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

Source: Jaipur News from Rajasthan News Paper